नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा के साथ ही पूरी दुनिया भर की निगाहें एक बार फिर उन व्यक्तियों पर टिकीं, जो शांति और लोकतंत्र के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं। इस साल का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार वेनेज़ुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो (María Corina Machado) को दिया गया है। उन्हें यह सम्मान उनके “वेनेज़ुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकार और शांतिपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन के प्रयासों” के लिए प्रदान किया गया है।
आखिर कौन हैं मारिया कोरीना माचाडो?
मारिया कोरीना माचाडो वेनेज़ुएला की एक प्रसिद्ध राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वे लंबे समय से देश में तानाशाही शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन का नेतृत्व करती रही हैं।
2024 के चुनावों से पहले सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया था और उन पर कई तरह के दबाव बनाए गए। इसके बावजूद उन्होंने अपने देश के नागरिकों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना जारी रखा।
नोबेल समिति ने उन्हें “नागरिक साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतीक” बताया। समिति के अनुसार, माचाडो ने हिंसा या विद्रोह का रास्ता नहीं चुना, बल्कि उन्होंने शांति और संवाद को ही लोकतंत्र की कुंजी बताया।
क्या है ?नोबेल समिति का बयान
नोबेल कमेटी ने कहा,
“मारिया कोरीना माचाडो ने दिखाया कि लोकतंत्र केवल सत्ता पाने का साधन नहीं, बल्कि लोगों की आज़ादी और न्याय की पहचान भी है।”
उनकी यह यात्रा न केवल वेनेज़ुएला के लिए बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका और दुनिया के लिए प्रेरणा बनी है।
क्या है ?दुनिया की प्रतिक्रियाएँ
इस घोषणा के बाद दुनिया भर से भर भर की प्रतिक्रियाए आईं।
- मारिया कोरीना माचाडो ने पुरस्कार को वेनेज़ुएला के नागरिकों को समर्पित किया और कहा कि यह उनके संघर्ष और बलिदान की पहचान है।
- उन्होंने अपने अंदाज़ में कहा कि यह सम्मान “तानाशाही पर सच्चाई की जीत” का प्रतीक है।
- वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इसे राजनीतिक निर्णय बताया।
– व्हाइट हाउस ने कहा कि “नोबेल समिति ने राजनीति को शांति से ऊपर रखा है।”
– वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों की सराहना की और कहा कि “शांति के लिए ट्रम्प के कूटनीतिक प्रयासों को भी सराहा जाना चाहिए।”
क्या है माचाडो का संदेश
माचाडो ने कहा,
“यह सम्मान केवल मेरा नहीं, हर उस नागरिक का है जो तानाशाही के सामने नहीं झुकता । यह वेनेज़ुएला के लोगों की आवाज़ है जो आज दुनिया भर में सुनी जा रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह पुरस्कार उन्हें और उनके समर्थकों को नई ऊर्जा देगा ताकि वे अपने देश को स्वतंत्र और लोकतांत्रिक बना सकें।
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस विचार का सम्मान है जो कहता है — “सच्ची शांति केवल तब संभव है जब हर व्यक्ति को अपने अधिकार और आज़ादी मिलें।”
मारिया कोरीना माचाडो की यह उपलब्धि दुनिया को यह याद दिलाती है कि संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर दिशा शांति और लोकतंत्र की हो, तो जीत निश्चित है।nobelprize.org
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