भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक ओर GDP ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा मजबूत है, वहीं दूसरी ओर महंगाई धीरे-धीरे काबू में आती दिख रही है। ऐसे माहौल में RBI Policy Meeting 2025 सबसे ज्यादा चर्चा में है। लोग यह जानना चाहते हैं कि गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में RBI इस बार क्या फैसला लेगा—रेट कट, रेट होल्ड या कोई नई नीति घोषणा?
इस बार की बैठक 3–5 दिसंबर के बीच हुई है और अंतिम दिन गवर्नर का बयान आने वाला है। हर बार की तरह इस बार भी घरेलू और वैश्विक संकेतों के आधार पर RBI बेहद सावधानी से कदम उठा रहा है।
1. अर्थव्यवस्था की स्थिति: ग्रोथ तेज
पिछले दो तिमाहियों में भारत की GDP ग्रोथ उम्मीदों से ऊपर रही है। निर्माण, सेवा और कृषि—तीनों सेक्टर से बेहतर आंकड़े आए हैं। बाज़ार विशेषज्ञ इस ग्रोथ को “broad-based recovery” बता रहे हैं।
- GDP Q2 ग्रोथ अनुमान से अधिक
- रोजगार और सेवाओं में सुधार
- निर्यात में हल्की बढ़त
इन संकेतों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मज़बूत स्थिति में है। यही कारण है कि RBI पर यह दबाव बढ़ा है कि क्या अब ब्याज दरों को कम किया जाए ताकि क्रेडिट ग्रोथ और बढ़ सके।
2. महंगाई नरम पड़ी, लेकिन पूरी तरह आरामदायक नहीं
Retail inflation में काफी राहत मिली है। फूड इंफ्लेशन भी पिछले महीनों की तुलना में काफी कंट्रोल में है।
लेकिन कुछ जोखिम अभी भी मौजूद हैं—
- सब्जी और दालों की कीमतों में कभी-कभी उछाल
- ग्लोबल क्रूड ऑयल की अनिश्चितता
- अंतरराष्ट्रीय मार्केट में डॉलर-रुपया उतार-चढ़ाव
RBI हमेशा संकेत देता है कि “inflation management” उसकी पहली प्राथमिकता है। इसलिए महंगाई पूरी तरह स्थिर हुए बिना RBI बड़ी कटौती से बच सकता है।
3. RBI किस दिशा में जा सकता है? दो मजबूत संभावनाएँ
A. Repo Rate में 25 bps की कटौती (संभावना 1)
कई अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि मजबूत ग्रोथ और नरम महंगाई RBI को rate cut करने का मौका दे सकती है।
क्यों?
- उपभोक्ताओं और बिजनेस दोनों को सस्ते लोन मिलेंगे
- रियल एस्टेट, ऑटो और MSME सेक्टर में तेजी
- त्योहारी सीज़न के बाद नए साल में demand को बूस्ट मिलेगा
अगर ऐसा होता है तो यह मौद्रिक नीति 2025 की सबसे बड़ी खबर हो सकती है।
B. Rates को होल्ड करने की तैयारी (संभावना 2)
कुछ जानकारों का कहना है कि RBI फिलहाल कोई जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।
क्यों?
- रुपये की कमजोरी
- अमेरिका और यूरोप में financial volatility
- global growth slowdown
- निवेशकों की सतर्कता
ऐसे माहौल में RBI “wait-and-watch” का रास्ता भी अपना सकता है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा कई बार कह चुके हैं कि “हमारे फैसले घरेलू आंकड़ों के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों पर भी निर्भर होंगे।”
इसलिए, स्थिरता को ध्यान में रखते हुए RBI संभव है कि repo rate को जैसे-का-तैसा रखे।
4. बाज़ार की उम्मीदें और निवेशकों का मूड
स्टॉक मार्केट में भी RBI नीति को लेकर काफी हलचल देखी जा रही है। निवेशक दो हिस्सों में बंटे हुए हैं—
- एक समूह मानता है कि RBI rate cut देगा
- दूसरा समूह कहता है कि फिलहाल pause ही सबसे सुरक्षित कदम है
बैंकिंग, NBFC, realty और auto सेक्टर की नज़रें इस फैसले पर टिकी हैं। अगर rate cut होती है, तो इन सेक्टरों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।
5. आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर Rate Cut होती है:
- होम लोन EMI कम होगी
- कार/बाइक लोन थोड़ा सस्ता
- बिजनेस लोन से MSMEs को राहत
- घर खरीदी और लोन की demand बढ़ेगी
अगर Rate Hold होता है:
- EMI में कोई बदलाव नहीं
- ब्याज दरें स्थिर
- बाज़ार में शांति और स्थिरता
दोनों ही स्थितियाँ पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालेंगी, इसलिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है।
6. गवर्नर मल्होत्रा की टीम की चुनौती
RBI के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखे।
- एक तरफ growth indicators पॉजिटिव हैं
- दूसरी तरफ inflation अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं
इसके अलावा global market uncertainty भी एक बड़ा कारक है। इसलिए RBI को हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।
7. नतीजा: देश की नज़र RBI के फैसले पर
RBI Policy Meeting 2025 सिर्फ एक आर्थिक घटना नहीं—यह देश की भविष्य दिशा तय करने वाला फैसला है। चाहे rate cut हो या hold, दोनों ही स्थितियों में इसका असर लोगों, बाजारों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत की growth story को देखते हुए RBI पर उम्मीदें ज्यादा हैं। अब सबकी नज़र गवर्नर संजय मल्होत्रा की घोषणा पर टिकी है, जो इस समय देश का सबसे चर्चित आर्थिक अपडेट है।