C P Radhakrishnan Biography: शुरुआती जीवन से भारत के 15वें उपराष्ट्रपति तक

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C P Radhakrishnan biography – संघ स्वयंसेवक से भारत के 15वें उपराष्ट्रपति तक

C P Radhakrishnan की biographi  भारतीय राजनीति की उस प्रेरणादायक कहानी को सामने लाती है, जिसमें एक साधारण स्वयंसेवक से उठ कर  देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुचते  है। 2025 में वे भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए और आज वे न सिर्फ़ दक्षिण भारत बल्कि पूरे देश की राजनीति में चर्चा का विषय हैं।

इनकी शुरुआती जीवन और शिक्षा

C P Radhakrishnan ji  का जन्म 4 मार्च 1957 को कोयंबटूर, तमिलनाडु में हुआ। उनका परिवार कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय से है। उनकी माता ने उनका नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से प्रेरित होकर रखा था ।
C P Radhakrishnan की biography यह भी बताती है कि उन्होंने V.O. चिदंबरम कॉलेज, तूतीकोरिन से BBA की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे खेलों और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

उनकी RSS और BJP से जुड़ाव

मात्र  16 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)  जॉइन किए  और एक  स्वयंसेवक बने। यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। आगे चलकर वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े और धीरे-धीरे तमिलनाडु की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा बने।

उनकी संसदीय करियर

C P Radhakrishnan ji का एक अहम हिस्सा उनका संसदीय सफर है। वे 1998 और 1999 में लगातार दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए। 1998 के कुख्यात कोयंबटूर बम धमाकों के बाद भी जनता ने उन पर भरोसा जताया। बाद में वे भाजपा तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

उनका राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम संवैधानिक पद भी संभाले। वे झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। राज्यपाल रहते हुए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग और सामंजस्य पर हमेशा बल दिया।

2025 का उपराष्ट्रपति चुनाव

C P Radhakrishnan ji  की  सबसे महत्वपूर्ण बात  है उनका उपराष्ट्रपति चुना जाना। 9 सितम्बर 2025 को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुधर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया। कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया, जिनमें से 752 वोट मान्य रहे।
12 सितम्बर 2025 को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

उनकी विचारधारा  क्या है ?

C P Radhakrishnan की कहानी  यह दर्शाती है कि वे हमेशा “सहकारी संघवाद” और केंद्र-राज्य सामंजस्य की बात करते रहे हैं। उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में “अजातशत्रु” (जिसका कोई दुश्मन न हो) भी कहा जाता है। उनका व्यक्तित्व शांत, सादगीपूर्ण और संवाद पर आधारित माना जाता है।

C P Radhakrishnan जी कहानी हमें यह सिखाती है कि कैसे एक साधारण स्वयंसेवक, समर्पण और सेवा के ज़रिए देश का उपराष्ट्रपति बन सकता है। उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत और अवसरों का उदाहरण है। आने वाले समय में उनसे उम्मीद है कि वे संसद की गरिमा और लोकतंत्र की मजबूती में बड़ी भूमिका निभाएँगे।

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